DRDO की स्वदेशी AIP प्रणाली का दूसरा चरण शुरू, 2027 की शुरुआत में नौसेना को सौंपी जाएगी
रक्षा मंत्रालय ने 24 अक्टूबर 2026 को बताया कि DRDO की स्वदेशी AIP प्रणाली के एनर्जी मॉड्यूल की ‘काम शुरू करना चरण-2’ गतिविधि का उद्घाटन हुआ। यह प्रणाली डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के पानी के नीचे रहने की क्षमता बढ़ाती है।
आपके लिए इसका मतलब
यह ख़बर आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ी नहीं है और इसके लिए किसी को कुछ करने की ज़रूरत नहीं है। यह भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों के लिए देश में बनी तकनीक से जुड़ी रक्षा क्षेत्र की जानकारी है।
मुख्य बातें
- उद्घाटन समारोह 24 अक्टूबर 2026 को लार्सन एंड टुब्रो के एएम नाइक हेवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स, हजीरा, गुजरात में हुआ।
- AIP प्रणाली DRDO की नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है।
- अगले चरण में एनर्जी मॉड्यूल को बिजली उत्पादन के लिए सक्रिय कर नौसेना की प्रक्रियाओं के अनुसार कड़ा परीक्षण किया जाएगा।
- परीक्षण के बाद इसे कालवारी-क्लास पनडुब्बी पर एकीकरण के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को 2027 की शुरुआत में सौंपा जाएगा।
क्या हुआ है
रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारतीय नौसेना की पानी के नीचे की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम मुकाम हासिल हुआ है। DRDO की नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला ने स्वदेशी रूप से एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम का एनर्जी मॉड्यूल विकसित किया है। इस मॉड्यूल की ‘काम शुरू करना चरण-2’ गतिविधि का उद्घाटन किया गया।
AIP प्रणाली क्या करती है
AIP प्रणाली डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की पानी के नीचे रहने की क्षमता बढ़ाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह प्रणाली पनडुब्बी की वायुमंडलीय ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करती है।
उद्घाटन कहाँ और कब हुआ
उद्घाटन समारोह 24 अक्टूबर 2026 को लार्सन एंड टुब्रो के एएम नाइक हेवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स, हजीरा, गुजरात में हुआ। रक्षा सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा DRDO के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि थे, जिन्होंने वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया। भारतीय नौसेना के सामग्री प्रमुख वाइस एडमिरल बी शिवकुमार और DRDO के महानिदेशक (नौसेना प्रणाली और सामग्री) डॉ. आर बाला मुरलिकृष्णन एल एंड टी हजीरा में मौजूद रहे।
अगला चरण क्या होगा
अगले चरण में AIP एनर्जी मॉड्यूल को बिजली उत्पादन के लिए सक्रिय किया जाएगा और भारतीय नौसेना की प्रक्रियाओं के अनुसार इसका कड़ा परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद इसे कालवारी-क्लास पनडुब्बी पर एकीकरण के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को 2027 की शुरुआत में सौंपा जाएगा।
अधिकारी ने क्या कहा
DRDO के अध्यक्ष ने इस मौके पर DRDO और उद्योग सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने देशी AIP कार्यक्रम में वैज्ञानिक धैर्य और औद्योगिक सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अब शॉप फ्लोर पर उत्पादक वास्तविकता में बदल चुका है। उन्होंने हर परीक्षण चरण में सहयोग के लिए भारतीय नौसेना का आभार भी जताया और नौसेना की समयसीमा पूरी करने के लिए अगले चरणों पर काम जारी रखने पर ज़ोर दिया। साथ ही हाइड्रोजन और ईंधन सेल प्रणाली की सुरक्षा संस्कृति बिना किसी समझौते के बनाए रखने को भी महत्वपूर्ण बताया।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है
यह रक्षा क्षेत्र की तकनीकी उपलब्धि है और इसका आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधा संबंध नहीं है। इसके लिए किसी को कोई आवेदन नहीं करना है और न ही कोई तारीख निभानी है।
सवाल-जवाब
AIP प्रणाली क्या है?
AIP यानी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन एक ऐसी प्रणाली है जो डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की पानी के नीचे रहने की क्षमता बढ़ाती है। यह पनडुब्बी की वायुमंडलीय ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करती है।
यह प्रणाली किसने बनाई है?
यह प्रणाली DRDO की नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है।
AIP एनर्जी मॉड्यूल को आगे क्या होगा?
अगले चरण में इसे बिजली उत्पादन के लिए सक्रिय किया जाएगा और नौसेना की प्रक्रियाओं के अनुसार कड़ा परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद इसे 2027 की शुरुआत में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को सौंपा जाएगा।
क्या आम लोगों को इसके लिए कुछ करना है?
नहीं, यह रक्षा क्षेत्र की तकनीकी उपलब्धि है और आम लोगों को इसके लिए कोई कार्रवाई नहीं करनी है।
स्रोत: PIB, "भारतीय नौसेना के डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के लिए स्वदेशी एआईपी प्रणाली ने ‘काम शुरू करना चरण-2’ (सेटिंग टू वर्क फ़ेज़-2) गतिविधि के उद्घाटन के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की", 24 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें
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