VB-G RAM G: NMMS ऐप का उन्नत फेस ऑथेंटिकेशन संस्करण जारी, फर्जी हाजिरी पर रोक
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 23 अक्टूबर 2026 को VB-G RAM G योजना के तहत मजदूरों की हाजिरी दर्ज करने वाले NMMS ऐप का उन्नत सुरक्षा संस्करण जारी किया। इसका असर ग्रामीण मजदूरों पर पड़ेगा, जिनकी उपस्थिति अब फेस ऑथेंटिकेशन से दर्ज होगी।
आपके लिए इसका मतलब
अगर आप VB-G RAM G योजना में मजदूरी करते हैं, तो आपकी हाजिरी पहले की तरह ऐप से ही लगेगी, लेकिन अब चेहरा पहचानने वाली जांच के साथ। जहां नेटवर्क नहीं है वहां ऑफलाइन हाजिरी की सुविधा रहेगी। दिव्यांग या बुजुर्ग मजदूर का चेहरा न मिलने पर मेट या क्षेत्रीय कार्यकर्ता छूट के लिए अनुरोध कर सकता है।
मुख्य बातें
- NMMS ऐप का उन्नत संस्करण 23 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ।
- ऐप IIT Madras के तकनीकी सहयोग और AI आधारित सत्यापन से लैस है।
- मार्च 2026 में ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन जोड़ा गया था।
- अब तक लगभग 46 करोड़ मानवदिवस बने, जिनमें से लगभग 40 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन से दर्ज हुए।
- वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र ने 95,692 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।
- देशभर में 10 करोड़ 99 लाख 70 हजार फार्मर आईडी बन चुकी हैं।
क्या जारी हुआ
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 23 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप का उन्नत सुरक्षा संस्करण जारी किया। यह ऐप VB-G RAM G यानी विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के काम आता है। मंत्रालय के अनुसार नया संस्करण IIT Madras के तकनीकी सहयोग, AI आधारित सत्यापन और मजबूत साइबर सुरक्षा से तैयार किया गया है।
क्या बदला है
मंत्री ने बताया कि पहले कार्यस्थलों पर फर्जी हाजिरी और दूसरे के नाम पर मजदूरी उठाने की शिकायतें आती थीं। इसे रोकने के लिए मार्च 2026 में ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन जोड़ा गया था। नए संस्करण में Google Play Integrity के साथ डिवाइस-स्तर की सुरक्षा जांच, डेटा का सुरक्षित संप्रेषण, क्लोनिंग व छेड़छाड़ के खिलाफ उपाय और लाइवनेस डिटेक्शन जोड़ा गया है। इससे यह पक्का होता है कि कैमरे के सामने असली और जीवित मजदूर ही है, कोई डमी या पुरानी तस्वीर नहीं।
किसे फ़ायदा होगा
योजना 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है। मंत्री के अनुसार अब तक 2.41 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में 31.23 लाख कार्यस्थलों पर काम हुआ और 2.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों के 3.65 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिला। लगभग 46 करोड़ मानवदिवस बने, जिनमें से लगभग 40 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन से दर्ज हुए।
नेटवर्क न हो तो क्या होगा
मंत्री ने भरोसा दिया कि किसी सच्चे मजदूर को नेटवर्क की कमी या तकनीकी रुकावट से काम या मजदूरी से वंचित नहीं रखा जाएगा। नेटवर्क न होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑफलाइन उपस्थिति दर्ज की जा सकती है और मस्टर रोल बंद होने के बाद उसे नेटवर्क वाले क्षेत्र में आकर अपलोड किया जा सकता है। दिव्यांगजन या बुजुर्ग श्रमिक का चेहरा न मिलने पर मेट या क्षेत्रीय कार्यकर्ता छूट व्यवस्था के लिए अनुरोध कर सकता है।
मजदूरी का पैसा कैसे पहुंचेगा
मंत्रालय के अनुसार सिर्फ ऐप में हाजिरी लगना मजदूरी का आधार नहीं है। AI आधारित फोटो डी-डुप्लीकेशन संदिग्ध तस्वीरें पकड़कर जांच पूरी होने तक वेजलिस्ट और फंड ट्रांसफर ऑर्डर रोक देता है। इलेक्ट्रॉनिक मापन पुस्तिका (e-MB) में तकनीकी अभियंता काम का भौतिक मापन दर्ज करते हैं, जिससे मजदूरी तय होती है। फिर DBT से पैसा सीधे बैंक खाते में जाता है।
निगरानी और बजट
मंत्री ने बताया कि जिलों में औचक निरीक्षण के लिए रैंडम जांच टीमें भेजी गई हैं और सोशल ऑडिट व सार्वजनिक प्रकटीकरण लागू है। राज्यों को संदिग्ध ऐप के इस्तेमाल पर नजर रखने और कानून के तहत मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र ने 95,692 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जो राज्यों के अंश मिलाकर 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पहली किस्त के रूप में 26,126 करोड़ रुपये की मदर सैंक्शन जारी की जा चुकी है।
फार्मर आईडी की प्रगति
कार्यक्रम में मंत्री ने बताया कि दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य था, लेकिन अब तक 10 करोड़ 99 लाख 70 हजार फार्मर आईडी बन चुकी हैं। उनके अनुसार 30 हजार और आईडी बनते ही 11 करोड़ का आंकड़ा पार हो जाएगा।
सवाल-जवाब
NMMS ऐप का नया संस्करण क्या करता है?
यह मजदूरों की हाजिरी चेहरे की पहचान से दर्ज करता है और ऐप से छेड़छाड़ व फर्जी हाजिरी पर रोक लगाता है। इसमें लाइवनेस डिटेक्शन है, यानी कैमरे के सामने असली और जीवित मजदूर ही माना जाएगा।
नेटवर्क न हो तो हाजिरी कैसे लगेगी?
नेटवर्क न होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑफलाइन उपस्थिति दर्ज की जा सकती है। मस्टर रोल बंद होने के बाद उसे नेटवर्क वाले क्षेत्र में आकर अपलोड किया जा सकता है।
चेहरा न मिलने पर क्या होगा?
दिव्यांगजन या बुजुर्ग श्रमिक का चेहरा न मिलने या मोबाइल में समस्या होने पर मेट या क्षेत्रीय कार्यकर्ता छूट व्यवस्था के लिए अनुरोध कर सकता है। यह अनुरोध निर्धारित व्यवस्था के तहत होगा।
VB-G RAM G योजना कब से लागू है?
यह योजना 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू की गई है। इसका पूरा नाम विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) है।
फार्मर आईडी कितनी बन गई हैं?
देश में अब तक 10 करोड़ 99 लाख 70 हजार फार्मर आईडी बन चुकी हैं। लक्ष्य दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ आईडी बनाने का था।
स्रोत: PIB, "पारदर्शिता की नई मिसाल: पीएम मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन के तहत वीबी-जी राम जी में NMMS का उन्नत फेस ऑथेंटिकेशन संस्करण केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया जारी", 23 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें
आधिकारिक सूचना से मिलाया: 24 अक्टूबर 2026. यह ख़बर आधिकारिक सूचना से AI की मदद से लिखी गई और प्रकाशन से पहले संपादक ने जाँची। गलती बताएँ