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RBI ने बैंकों के leverage ratio नियम बदले, D-SIB के लिए 4% और अन्य बैंकों के लिए 3.5% तय

RBI ने 23 अक्टूबर 2026 को Commercial Banks के Capital Adequacy Directions में ग्यारहवां संशोधन जारी किया, जिसमें leverage ratio की परिभाषा और न्यूनतम सीमा तय की गई है। यह बदलाव सीधे आम जमाकर्ताओं या ग्राहकों पर लागू नहीं होता, बल्कि बैंकों की पूंजी व्यवस्था से जुड़ा है।

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आपके लिए इसका मतलब

यह आदेश बैंकों के लिए है, आम लोगों के लिए नहीं। आपको कोई फॉर्म नहीं भरना है और कोई तारीख नहीं है जिस तक कुछ करना हो। यह नियम बैंकों की वित्तीय मजबूती जांचने का तरीका तय करता है, जिससे लंबे समय में बैंकिंग व्यवस्था भरोसेमंद बनी रहे।

मुख्य बातें

  • RBI ने यह संशोधन 23 अक्टूबर 2026 को जारी किया।
  • D-SIB (domestic systemically important bank) के लिए न्यूनतम leverage ratio 4 प्रतिशत तय किया गया है।
  • अन्य बैंकों के लिए न्यूनतम leverage ratio 3.5 प्रतिशत है।
  • G-SIB branch को 3.5 प्रतिशत के साथ अपना G-SIB leverage ratio buffer भी बनाए रखना होगा।
  • यह संशोधन Basel Committee के 'leverage ratio 2017 standard' से तालमेल के लिए किया गया है।

क्या बदला है

RBI ने Commercial Banks – Prudential Norms on Capital Adequacy Directions, 2025 के Chapter VII (Leverage Ratio framework) में संशोधन किया है। अब leverage ratio की परिभाषा, न्यूनतम जरूरत और लागू होने का दायरा नए सिरे से तय किया गया है। RBI के मुताबिक यह बदलाव Basel Committee on Banking Supervision के ‘leverage ratio 2017 standard’ से तालमेल के लिए जरूरी था।

leverage ratio क्या है

RBI के अनुसार leverage ratio बैंक की पूंजी (capital measure) को उसके कुल exposure (exposure measure) से भाग देकर निकाला जाता है और इसे प्रतिशत में दिखाया जाता है। सरल शब्दों में, यह देखने का तरीका है कि बैंक के पास अपने कामकाज के मुकाबले कितनी पूंजी है।

किस बैंक पर कितना नियम

संशोधित नियम के मुताबिक D-SIB (domestic systemically important bank) के लिए न्यूनतम leverage ratio 4 प्रतिशत है, जबकि अन्य बैंकों के लिए यह 3.5 प्रतिशत है। भारत में किसी G-SIB (global systemically important bank) की शाखा को 3.5 प्रतिशत के साथ अपना G-SIB leverage ratio buffer भी बनाए रखना होगा, जिसमें उसके home regulator द्वारा तय किया गया अतिरिक्त buffer भी शामिल है।

G-SIB branch पर क्या असर

जो G-SIB branch अपना leverage ratio buffer पूरा नहीं करता, उस पर capital distribution constraints लगेंगे। RBI ने बताया कि ये constraints शाखा के CET1 risk-based ratio और leverage ratio पर निर्भर करेंगे। जो शाखा दोनों जरूरतें पूरी करती है, उस पर minimum capital conservation standards लागू नहीं होंगे। जो एक जरूरत पूरी नहीं करती, उस पर उससे जुड़ा standard लगेगा, और जो दोनों पूरी नहीं करती, उस पर दोनों में से कड़ा standard लगेगा।

आम लोगों के लिए इसका मतलब

यह आदेश सीधे आम जमाकर्ताओं, खाताधारकों या कर्ज लेने वालों के लिए नहीं है। इसमें ऐसी कोई तारीख या शर्त नहीं दी गई है जिस पर आम नागरिक को कुछ करना हो। यह बैंकों की पूंजी व्यवस्था से जुड़ा तकनीकी नियम है, जिसका मकसद बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत रखना बताया गया है।

सवाल-जवाब

RBI का यह नया नियम आम बैंक ग्राहकों पर लागू होता है?

नहीं, यह सीधे आम ग्राहकों पर लागू नहीं होता। यह बैंकों के लिए पूंजी और leverage ratio से जुड़ा नियम है।

D-SIB बैंक के लिए leverage ratio कितना होना चाहिए?

D-SIB के लिए न्यूनतम leverage ratio 4 प्रतिशत तय किया गया है। अन्य बैंकों के लिए यह 3.5 प्रतिशत है।

G-SIB branch पर क्या नियम लागू होंगे?

G-SIB branch को 3.5 प्रतिशत leverage ratio के साथ अपना G-SIB leverage ratio buffer भी बनाए रखना होगा। अगर वह इस buffer को पूरा नहीं करता, तो उस पर capital distribution constraints लगेंगे।

यह संशोधन क्यों किया गया?

RBI ने कहा है कि यह Basel Committee के 'leverage ratio 2017 standard' से तालमेल बिठाने के लिए किया गया है।

स्रोत: RBI, "Reserve Bank of India (Commercial Banks – Prudential Norms on Capital Adequacy) Eleventh Amendment Directions, 2026", 23 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें

आधिकारिक सूचना से मिलाया: 24 अक्टूबर 2026. यह ख़बर आधिकारिक सूचना से AI की मदद से लिखी गई और प्रकाशन से पहले संपादक ने जाँची। गलती बताएँ