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CAQM टीम ने पंजाब में पराली प्रबंधन की समीक्षा की, मशीनें समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल ने 23 अक्टूबर को पंजाब के रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर में धान की पराली प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की। इसका असर उन किसानों और इलाकों पर पड़ेगा जहां पराली जलाने से हवा खराब होती है।

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आपके लिए इसका मतलब

यह खबर सीधे पंजाब के किसानों और वहां के अधिकारियों से जुड़ी है। आम लोगों को कोई फॉर्म नहीं भरना है और कोई तारीख नहीं निभानी है। लेकिन अगर पराली कम जलेगी तो दिल्ली-एनसीआर और आसपास की हवा में सुधार हो सकता है, जिसका फायदा वहां रहने वाले लोगों को मिलता है।

मुख्य बातें

  • दल ने 23 अक्टूबर 2026 को रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर का दौरा किया।
  • दल ने ताप विद्युत संयंत्र, सीबीजी संयंत्र, कृषि विज्ञान केन्द्र (KVK), खेत और एक बायोमास संयंत्र देखा।
  • CAQM ने ताप विद्युत संयंत्रों में को-फायरिंग के तय लक्ष्य पूरे करने का निर्देश दिया।
  • अधिकारियों को किसानों तक समय पर फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें पहुंचाने को कहा गया।
  • खेतों में सक्रिय निगरानी रखने और कमियां तुरंत दूर करने पर जोर दिया गया।

क्या हुआ

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल ने पंजाब के रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर का दौरा किया। दल ने ताप विद्युत संयंत्रों, सीबीजी संयंत्रों, कृषि विज्ञान केन्द्र (KVK), खेतों और एक बायोमास संयंत्र को देखा।

दौरे का मकसद धान की इस कटाई के मौसम में पराली को संभालने की तैयारियां जांचना था। दल ने देखा कि पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए जमीन पर कौन-कौन से उपाय किए जा रहे हैं।

क्या बदला है

इस दौरे में कोई नया नियम या तारीख नहीं बताई गई। आयोग ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। ताप विद्युत संयंत्रों में को-फायरिंग के तय लक्ष्य पूरे करने को कहा गया है। साथ ही उत्सर्जन मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

को-फायरिंग का मतलब है बिजली संयंत्रों में कोयले के साथ पराली जैसे कृषि अवशेष का भी इस्तेमाल करना। इससे पराली खेत में जलाने की जरूरत कम हो सकती है।

किसानों के लिए क्या कहा गया

KVK के दौरे में दल ने पराली को खेत में ही संभालने और बाहर भेजकर इस्तेमाल करने वाली मशीनों का प्रदर्शन देखा। दल ने यह भी जांचा कि किसानों की मदद के लिए मशीनें कितनी हैं और कितनी आसानी से मिल सकती हैं।

धान की कटाई तेज होने के साथ आयोग ने कहा कि सभी संबंधित विभाग आपस में तालमेल बढ़ाएं। किसानों को समय पर फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें मिलें, इस पर ध्यान दिया जाए। खासकर कटाई के चरम समय में मशीनों की उपलब्धता और उनके सही इस्तेमाल पर जोर दिया गया।

आगे क्या होगा

आयोग ने राज्य के अधिकारियों से कहा कि पराली प्रबंधन की व्यवस्थाएं मजबूत करें। खेतों में सक्रिय निगरानी रखी जाए और काम में जो कमियां दिखें, उन्हें समय पर ठीक किया जाए। इसका मकसद पराली जलाने की घटनाओं को कम करना है।

आम लोगों पर क्या असर

यह खबर सीधे पंजाब के किसानों और वहां के अधिकारियों से जुड़ी है। आम लोगों को इसके लिए कोई आवेदन नहीं करना है और कोई तारीख नहीं निभानी है। लेकिन पराली कम जलने से उन इलाकों की हवा साफ रहने में मदद मिल सकती है, जहां इसका धुआं पहुंचता है।

सवाल-जवाब

CAQM क्या है?

CAQM यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग है। यह दिल्ली-एनसीआर और आसपास की हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम करता है।

CAQM की टीम ने कहां-कहां दौरा किया?

टीम ने पंजाब के रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर में दौरा किया। यहां उसने ताप विद्युत संयंत्र, सीबीजी संयंत्र, कृषि विज्ञान केन्द्र, खेत और एक बायोमास संयंत्र देखा।

किसानों के लिए क्या निर्देश दिए गए?

आयोग ने कहा कि किसानों को समय पर फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें मिलें और उन्हें अधिकतम सहायता दी जाए। खासकर कटाई के चरम समय में मशीनों की उपलब्धता पर ध्यान देने को कहा गया।

क्या आम लोगों को कुछ करना है?

नहीं, इस खबर में आम लोगों के लिए कोई आवेदन या तारीख नहीं बताई गई है। यह निर्देश राज्य के अधिकारियों और संयंत्रों के लिए हैं।

पराली जलाना कम करने से किसे फायदा होगा?

आयोग का मकसद पराली जलाने की घटनाएं कम करना है। इससे उन इलाकों की हवा साफ रहने में मदद मिल सकती है जहां पराली का धुआं पहुंचता है।

स्रोत: PIB, "सीएक्यूएम के अध्यक्ष के नेतृत्व में उच्चस्तरीय दल ने रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर में धान की पराली के प्रबंधन संबंधी उपायों की समीक्षा की", 23 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें

आधिकारिक सूचना से मिलाया: 24 अक्टूबर 2026. यह ख़बर आधिकारिक सूचना से AI की मदद से लिखी गई और प्रकाशन से पहले संपादक ने जाँची। गलती बताएँ