# कपास चुनने वाले मज़दूरों के लिए सुरक्षात्मक दस्ताने: ICAR-CIRCOT ने कंपनी से समझौता किया

URL: https://kasba.co.in/story/protective-gloves-for-cotton-pickers-icar-circot-signs-techn
Language: hi · Section: Farming · Published: 2026-10-24
Source: PIB, "भाकृअनुप-सिरकॉट ने कपास चुनने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षात्मक दस्तानों के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए", 2026-10-23, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2327350

भाकृअनुप-सिरकॉट (ICAR-CIRCOT), मुंबई ने 22 अक्टूबर 2026 को कपास चुनने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षात्मक दस्तानों की तकनीक एक कंपनी को देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसका असर कपास किसानों और खेत मज़दूरों पर पड़ेगा, जिन्हें तुड़ाई के समय हाथ बचाने वाले दस्ताने मिल सकेंगे।

## आपके लिए इसका मतलब

यह समझौता सीधे किसी आम नागरिक से नहीं, बल्कि कपास की खेती और तुड़ाई से जुड़े किसानों और मज़दूरों से जुड़ा है। दस्ताने बनाने वाली कंपनी को तकनीक मिलने से बाज़ार में ऐसे दस्ताने आसानी से मिल सकेंगे। आम लोगों को अभी कोई फ़ॉर्म भरने या आवेदन करने की ज़रूरत नहीं है; दस्ताने कब और कहाँ मिलेंगे, इसकी जानकारी इस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।

## मुख्य बातें

- समझौता ज्ञापन 22 अक्टूबर 2026 को हस्ताक्षरित हुआ
- तकनीक भाकृअनुप-सिरकॉट (ICAR-CIRCOT), मुंबई की है
- तकनीक मैसर्स ट्रस्ट एआरएस रबर प्राइवेट लिमिटेड, चेंगलपट्टू को दी गई
- दस्ताने कपास के नुकीले सहपत्रों (ब्रोक्ट्स) से हाथों को बचाने के लिए बनाए गए हैं
- दस्ताने दोबारा इस्तेमाल हो सकते हैं और टिकाऊ हैं
- विज्ञप्ति 23 अक्टूबर 2026 को जारी हुई

## क्या हुआ है

भाकृअनुप–केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIRCOT), मुंबई ने 22 अक्टूबर 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता "कपास चुनने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षात्मक दस्ताने" बनाने की तकनीक को मैसर्स ट्रस्ट एआरएस रबर प्राइवेट लिमिटेड, चेंगलपट्टू को देने के लिए है।

सरल शब्दों में, संस्थान ने अपनी बनाई तकनीक एक कंपनी को सौंपी है ताकि वह इन दस्तानों को बड़े पैमाने पर बना और बेच सके।

## दस्ताने क्यों बनाए गए

विज्ञप्ति के अनुसार यह तकनीक कटाई और तुड़ाई के दौरान कपास चुनने वाले श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए विकसित की गई है। कपास के पौधे पर नुकीले सहपत्र (ब्रोक्ट्स) होते हैं, जिनसे तुड़ाई करते समय हाथों में चोट लग सकती है।

खास तौर पर डिज़ाइन किए गए ये दस्ताने इन नुकीले हिस्सों से हाथों को बचाते हैं और साथ में लचीलापन व आराम भी देते हैं। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि ये दस्ताने दोबारा इस्तेमाल योग्य (reusable) और टिकाऊ हैं, इसलिए खेत की कठिन परिस्थितियों में इन्हें बार-बार पहना जा सकता है।

## किसे फ़ायदा होगा

विज्ञप्ति के मुताबिक इस तकनीक हस्तांतरण से दस्तानों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिलने और इनकी व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है। इससे कपास किसानों और कृषि श्रमिकों को सीधा लाभ होगा।

इस पहल का मकसद उपयुक्त सुरक्षात्मक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाना, हाथों में लगने वाली चोटें कम करना, काम की स्थितियाँ सुधारना और सुरक्षित तुड़ाई को बढ़ावा देना बताया गया है।

## आगे क्या होगा

विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया है कि दस्ताने कब से बाज़ार में आएँगे, कहाँ मिलेंगे या इनकी कीमत क्या होगी। यह भी नहीं कहा गया है कि किसानों या मज़दूरों को ये दस्ताने किसी योजना के तहत मुफ़्त मिलेंगे।

संस्थान ने इस साझेदारी को उद्योग और अनुसंधान के बीच सहयोग मज़बूत करने की दिशा में एक कदम बताया है, ताकि उसकी तकनीक खेत के स्तर की चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान बन सके।

## आम लोगों पर असर

यह खबर आम नागरिकों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे नहीं जुड़ी है। इसका संबंध कपास की खेती, तुड़ाई और उससे जुड़े मज़दूरों से है। जिन लोगों को कपास तुड़ाई में हाथों की चोट का सामना करना पड़ता है, उनके लिए यह उपयोगी जानकारी है।

## सवाल-जवाब

**कपास चुनने वाले दस्ताने किसने बनाए हैं?**
यह तकनीक भाकृअनुप-सिरकॉट (ICAR-CIRCOT), मुंबई ने विकसित की है। संस्थान ने इसे बनाने और बाज़ार में पहुँचाने के लिए एक कंपनी को सौंपा है।

**ये दस्ताने किस काम आते हैं?**
ये दस्ताने कपास तोड़ते समय कपास के नुकीले सहपत्रों (ब्रोक्ट्स) से हाथों में लगने वाली चोट से बचाते हैं। साथ ही इनमें लचीलापन और आराम भी है।

**क्या दस्ताने दोबारा इस्तेमाल हो सकते हैं?**
हाँ, विज्ञप्ति के अनुसार ये दस्ताने दोबारा इस्तेमाल योग्य (reusable) और टिकाऊ हैं। इसलिए खेत के कठिन काम में इन्हें बार-बार पहना जा सकता है।

**क्या मुझे इन दस्तानों के लिए आवेदन करना है?**
नहीं, विज्ञप्ति में आम लोगों के लिए किसी आवेदन या फ़ॉर्म का ज़िक्र नहीं है। यह समझौता तकनीक देने और दस्तानों के व्यावसायिक उत्पादन से जुड़ा है।

**दस्ताने कब से मिलने लगेंगे?**
इस बारे में विज्ञप्ति में कोई तारीख नहीं दी गई है। विज्ञप्ति में सिर्फ़ यह कहा गया है कि इससे दस्तानों की व्यापक उपलब्धता की उम्मीद है।

कस्बा डेस्क, Kasba. यह ख़बर आधिकारिक सूचना से AI की मदद से लिखी गई और प्रकाशन से पहले संपादक ने जाँची।
