# सी-डेक और बैंक ऑफ इंडिया ने क्वांटम बैंकिंग तकनीक पर समझौता किया

URL: https://kasba.co.in/story/c-dac-and-bank-of-india-sign-mou-on-quantum-tech-for-banking
Language: hi · Section: Money · Published: 2026-10-24
Source: PIB, "बैंकिंग अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की दिशा में सी-डेक और बैंक ऑफ इंडिया ने हाथ मिलाया", 2026-10-23, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2327342

सी-डेक और बैंक ऑफ इंडिया ने 22 अक्टूबर 2026 को बैंकिंग के लिए स्वदेशी क्वांटम और अन्य उभरती तकनीकों पर शोध के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसका असर आम ग्राहकों पर अभी सीधे नहीं पड़ता; यह भविष्य की बैंकिंग सुरक्षा और सेवाओं पर काम की शुरुआत है।

## आपके लिए इसका मतलब

आम खाताधारकों को अभी कोई फॉर्म नहीं भरना है और कोई तारीख नहीं निभानी है। यह समझौता बैंक और सी-डेक के बीच शोध और परीक्षण का ढांचा है, इसलिए आपकी बैंकिंग सेवा में तुरंत कोई बदलाव नहीं आएगा। लंबे समय में इसका मकसद बैंकिंग सिस्टम को क्वांटम तकनीक से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

## मुख्य बातें

- समझौता ज्ञापन पर 22 अक्टूबर 2026 को हस्ताक्षर हुए।
- यह सी-डेक और बैंक ऑफ इंडिया के बीच है।
- सी-डेक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अधीन स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है।
- काम के क्षेत्र: क्वांटम तकनीक, ब्लॉकचेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और स्वदेशी तकनीक विकास।
- सुरक्षित सैंडबॉक्स में अवधारणाओं के प्रमाण दिखाना और आगे के लिए रोडमैप बनाना लक्ष्य है।
- प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

## क्या हुआ है

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था सी-डेक और बैंक ऑफ इंडिया ने 22 अक्टूबर 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसका मकसद बैंकिंग में क्वांटम वित्तीय नवाचार और उभरती तकनीकों को अपनाने पर साथ काम करना है।

## समझौते में क्या तय हुआ

समझौते के तहत दोनों संस्थाओं के लिए बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र की अहम तकनीकों पर संयुक्त शोध, विकास, प्रायोगिक कार्यान्वयन, तकनीक प्रदर्शन और क्षमता निर्माण का ढांचा बना है। सी-डेक की हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा और स्वदेशी तकनीक विकास की क्षमता को बैंक ऑफ इंडिया की बैंकिंग विशेषज्ञता और देशभर में फैले तकनीकी वातावरण से जोड़ा जाएगा।

## क्वांटम तकनीक पर खास जोर

साझेदारी का एक प्रमुख लक्ष्य वित्तीय नवाचार के लिए क्वांटम तंत्र विकसित करना है। इससे बैंकिंग सिस्टम को क्वांटम तकनीक से जुड़े अवसरों और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार करने की कोशिश होगी। दोनों संस्थाएं क्वांटम-प्रेरित और क्वांटम-सुरक्षित तकनीकों पर साथ काम करेंगी, जिससे बैंकिंग व्यवस्था में सुरक्षा, भरोसा, लचीलापन और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो सके।

## आगे क्या होगा

समझौते के अनुसार पहले बैंकिंग उपयोगों की प्राथमिकता वाली सूची तय की जाएगी। फिर सुरक्षित सैंडबॉक्स वातावरण में अवधारणाओं के प्रमाण दिखाए जाएंगे और तकनीकी व्यवहार्यता तथा संभावित बैंकिंग मूल्य का आकलन होगा। इसके बाद मौजूदा व्यवस्थाओं के मुकाबले नए तरीकों के मानकीकरण और आगे के विकास, प्रायोगिक परियोजनाओं या अपनाने के लिए रोडमैप बनाया जाएगा।

## क्वांटम के अलावा और क्या शामिल है

समझौता ज्ञापन ब्लॉकचेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी अन्य उभरती तकनीकों में सहयोग का ढांचा भी देता है। संभावित क्षेत्रों में दस्तावेज़ों का बुद्धिमान तरीके से प्रसंस्करण, ग्राहक और कर्मचारी सहायता, धोखाधड़ी विश्लेषण, क्रेडिट और वित्तीय विश्लेषण, सुरक्षित एआई प्लेटफॉर्म, जिम्मेदार एआई, स्मार्ट अनुबंध, डिजिटल पहचान और सुरक्षित डेटा साझाकरण शामिल हैं।

## किसे फ़ायदा होगा

यह साझेदारी क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों पर भी ध्यान देगी, ताकि भविष्य के लिए तैयार कुशल लोगों का समूह बन सके। मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने इस मौके पर कहा कि बढ़ती साइबर सुरक्षा चिंताओं और उभरते तकनीकी खतरों के दौर में क्वांटम-प्रतिरोधी वित्तीय व्यवस्था बनाना जरूरी है।

## आम लोगों को क्या करना है

फिलहाल कुछ नहीं। यह बैंक और सी-डेक के बीच शोध और परीक्षण का समझौता है, इसलिए खाताधारकों के लिए कोई आवेदन, शुल्क या तारीख तय नहीं की गई है। बैंकिंग सेवाओं में बदलाव होने पर उसकी जानकारी अलग से दी जाएगी।

## सवाल-जवाब

**सी-डेक और बैंक ऑफ इंडिया का समझौता कब हुआ?**
22 अक्टूबर 2026 को। इस दिन दोनों संस्थाओं ने क्वांटम वित्तीय नवाचार और बैंकिंग में उभरती तकनीकों को अपनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

**क्या इससे आम बैंक ग्राहकों पर कोई असर पड़ेगा?**
अभी सीधा असर नहीं। यह शोध, परीक्षण और क्षमता निर्माण का ढांचा है, इसलिए खाताधारकों को कोई नया काम या आवेदन नहीं करना है।

**इस समझौते में किन तकनीकों पर काम होगा?**
क्वांटम तकनीक, ब्लॉकचेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और स्वदेशी तकनीक विकास पर। इसके अलावा दस्तावेज़ प्रसंस्करण, धोखाधड़ी विश्लेषण, क्रेडिट विश्लेषण और डिजिटल पहचान जैसे बैंकिंग उपयोग भी शामिल हैं।

**सी-डेक क्या है?**
सी-डेक यानी सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है।

**क्या इस समझौते से बैंकिंग सेवाएं तुरंत बदल जाएंगी?**
नहीं। समझौते में कहा गया है कि पहले बैंकिंग उपयोगों की पहचान, सुरक्षित सैंडबॉक्स में परीक्षण और व्यवहार्यता का आकलन होगा, उसके बाद आगे के लिए रोडमैप बनेगा।

कस्बा डेस्क, Kasba. यह ख़बर आधिकारिक सूचना से AI की मदद से लिखी गई और प्रकाशन से पहले संपादक ने जाँची।
